अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए ऐसे लोगो को चर्चा में बिठाना भारी पड़ा,टीवी चैनलों को।

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टीवी एंकरों को धमकी मामला :

पहले तो देश के प्रमुख टीवी चैनलों के एंकर ऐसे-ऐसे लोगो को चर्चा में बुलाकर बिठाते थे, जो अपनी बदजुबानी से देश के प्रधानमंत्री, देश के अंदर गंगा जमुनी तहजीब को बिगाड़ने की,समाज को बांटने,और हद तो तब हो गई जब करोंना जैसी घातक महामारी को दरकिनार करते हुए,तब्लीकी जमात के द्वारा जो घिनौना कदम उठाया गया,उसका भी समर्थन करना ऐसे लोगों की आदत की बजह से देश का जो माहौल बिगड़ा है, उसमें टीवी चैनल भी बराबर जिम्मेदार हैं, यह सिर्फ भारत मे ही सम्भव है कि आप टीवी चैनल पर बैठकर देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, और देश की व्यवस्था को खुलकर गाली दो,क्योंकि यहां बोलने की आजादी है, जिसे अभिव्यक्ति की आजादी की संघया दी गई, किसी कवि की ये पंक्तियां अनायास ही याद आ गई जिसमें, जितना पियेगा दूध उतना बढ़ेगा बिष। अर्थार्त आप सांप को अगर ढूध पिलाओगे तो वह विष ही उगलेगा,यही हाल मौलाना अली का है, उनको पहले टीवी चर्चा में आग उगलने से नही रोका गया,और जब उन्होंने टीवी चैनल एंकरों को धमकी देनी शुरू की तो चैनल में हड़कंप मच गयी,फिर तो सभी मौलाना से माफी मांगने के लिए दवाब बनाने लगे,ये कहा कि सभ्यता का प्रतीक है, टीवी चैनलो ने पहले इनके इतने भाव क्यों बढ़ा दिए,जिसकी बजह से उनकी हिम्मत इतनी बढ़ गई,कि बो चैनल के एंकरों को ही धमकी देने लगे।मेरा अनुरोथ है टीवी चैनलों से कि निहित स्वार्थों से हटकर देश हित के लिए ऐसे बुद्धजीवियों को चर्चा में बुलाओ जो देश के हित की बात करे न कि देश मे अराजकता का माहौल पैदा करने के लिए बदजुबानी करते हैं।

विचार:- देवेंद्र शर्मा देवू।

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