Acharya Manoj Awasthi Ji Maharaj

अपनी तरक्की में आप स्वयं ही बाधा हैं

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एक दिन की बात है जब सभी कर्मचारी ऑफिस पहुंचे और उन्होंने देखा कि दरवाजे पर एक नोट लिखा था ‘वह व्यक्ति जो आपकी तरक्की में बाधा पहुंचा रहा था कल उसकी मृत्यु हो गई’ हम आपको उनके अंतिम संस्कार के लिए आमंत्रित करते है। शुरुआत में सभी कर्मचारी ये बात सुनकर उदास हो गए की उनका एक साथी अब उनके साथ नहीं रहा लेकिन कुछ समय बाद वह सभी यह जानने को उत्सुक हो गए की वो कौन था जो अपने साथियों और अपनी कंपनी की तरक्की रोकना चाहता था।
बहुत से लोग अंतिम संस्कार के लिए एकत्रित हुए। कर्मचारियों में उसे देखने की बहुत इच्छा थी। एक-एक करके कर्मचारी ताबूत के निकट उसे देखने गए और जब उन्होंने उस ताबूत के अंदर देखा तो सभी चौंक गए। उस ताबूत के अंदर एक शीशा था जिसने भी ताबूत के अंदर देखा उसने अपने आप को उस ताबूत के अंदर पाया। शीशे के पास ही कुछ लिखा हुआ था ‘केवल एक व्यक्ति ही आपकी प्रगति को सीमित कर सकता है उसे रोक सकता है और वह केवल आप स्वयं हो’ आप ही वह व्यक्ति है जो अपने जीवन में क्रांति ला सकते है। आप ही केवल ऐसे व्यक्ति है अपनी खुशियों अपनी कामयाबियों को प्रभावित कर सकते है।

विश्व एक शीशे के समान है। जो आपके विचार, सोच और मजबूत विश्वासों के प्रतिबिंब को आपको वापिस देता है। इसलिए मेहनत करें और आगे बढ़े।

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