मन बहुत बेचैन है:- सुधा राजे

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सुधा राजे की कलम से –

कितना गिर चुका है मानव ? कॉरोना आपदा में झारखंड में छात्रा का गैंग रेप ,ग्वालियर में राशन लेने गयी स्त्री से दुकानदार का रेप , बिहार का मजदूर सड़क पर और बिहार के मंत्री बहाने खोज रहे हैं , दिल्ली की श्रमशक्ति पलायन कर रही है बेहाल और दिल्ली के लोग डर के मारे दड़बों में बंद है ???


डेंगू से भी मरे थे लोग
मलेरिया से भी मरे थे लोग
स्वाईन फ्लू से मरे थे
पीलिया से भी मरे थे लोग
कैंसर से भी मरे थे लोग
लोग चेचक से भी मरे
मस्तिष्क ज्वर जापानी बुखार से मरे
लोग मरे टी बी से
लोग हार्ट फेल से भी मरे
डायबिटीज से भी मरते हैं
लोग सड़क दुर्घटना में मर जाते हैं
लोग मर जाते है भगदड़ में
लोग सीमा पर मरते हैं
लेकिन
मृत्यु नहीं डरा पायी भारत को !!!!
हमारे पूर्वजों की राजधानियां तोपों से ध्वस्त कर दीं फांसी चढ़ा दिया गोलियां तलवारें चली
सती हो गयीं नगरी की नगरी
लेकिन
भारत नहीं डरा

तुम भारत को डराना चाहते हो ???
कोई नहीं मरेगा कॉरोना से ?
डर से मरेगा
डरपोक मरेगा
दड़बों में बंद पापी लोग स्वार्थी लोग जो महीनों का सामान जमा कर रहे हैं
वे लोग जीवित ही मर चुके हैं
उनकी जिंदगी समाज देश परिवार तक के किसी काम की नहीं है
मास्क बांटकर
फोटो खिंचाने वालो
भारत का गरीब
तौलिया से पसीना पोंछकर मार डालेगा कॉरोना
कहां से लायेगा हर समय मास्क ?
कितनी देर मुँह ढंकेगा मजदूर ??

पसीने से तर मास्क की क्या गारंटी है
बस गारंटी है कि
वह जीयेगा
मिट्टी गोबर पसीेने में अपनी मेहनत के दम पर
पुलिस से कह दो लाठी रख दें
और
नेता जो ट्विटर पर बखान करता मिले अपनी अपनी दान की घोषड़ा उससे कहो पांच परिवार गोद ले ले तीन माह के लिये दम है ?
तुमसे तो वे हिजड़े वंदनीय है जो रेहड़ी में सीधा राशन लेकर घर घर जाकर मना मना कर परांत भऱ ऱहे हैं
वोट देने से भला है किसी किसी मजदूर को गमछे बांट दें पसीना पोंछने को
छि:

(सुधा राजे)

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