Acharya Manoj Awasthi Ji Maharaj

राफेल, नोटबंदी और बड़े कर्ज डूबने पर होगी 2019 की जंग

0

पहली पड़ताल फ्रांस के साथ हुए 36 फाइटर प्लेन राफेल के सौदे की है। इसकी शुरुआती छानबीन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने शुरू कर दी है। दूसरा मामला नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स यानी एनपीए का है। इस पर संसद की प्राक्कलन समिति रिपोर्ट तैयार कर रही है। तीसरा मामला नोटबंदी का है, जिस पर वित्त मंत्रालय की स्थायी समिति की रिपोर्ट एडवांस्ड स्टेज में है। कांग्रेस राफेल सौदा, नोटबंदी और करोड़ों रुपए का कर्ज लेकर फरार हुए भगौड़ों के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है। ये तीनों रिपोर्ट 2019 में विपक्ष को पैने हथियार देंगी।

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि इतना तो स्पष्ट है कि सरकार नोटबंदी जैसे अहंकारी कदम को सही साबित नहीं कर पाएगी। यही वजह है कि उसकी कोशिश इस रिपोर्ट को लटकाए रखने की है। इस मुद्दे पर संसद की प्राक्कलन समिति की रिपोर्ट मोदी सरकार के लिए टेढ़ी खीर है, क्योंकि इस कमेटी की अध्यक्षता भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी कर रहे हैं।

इधर, वित्त मंत्रालय की स्थायी समिति नोटबंदी के फायदे-नुकसान पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार कर रही है। इस समिति की कमान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली के हाथ में है और उनसे सरकार किसी तरह की रियायत की उम्मीद नहीं कर सकती। राफेल विमानों के सौदे की पूरी जांच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक राजीव महर्षि और उनकी टीम कर रही है। यह सौदा 59 हजार करोड़ रुपए का है।

सूत्रों ने दैनिक भास्कर को बताया कि कैग पर इस बात का दबाव है कि इस सौदे का ‘टाइमबाउंड फॉरेंसिक आॅडिट’ हो। विपक्ष की मांग है कि अंतिम रिपोर्ट मौजूदा लोकसभा के कार्यकाल में ही पेश की जाए। इस पर आॅडिटर्स में विवाद है। सौदे में आपराधिक सांठगांठ के पहलू पर बहस यह है कि यह कैग के मैंडेट में आता है या नहीं।

कांग्रेस कैग पर दबाव बनाए हुए है। उसका प्रतिनिधि मंडल कैग से पिछले एक महीने में दो बार मिल चुका है। कांग्रेस का आरोप है कि कैग राफेल मामले में सरकार को क्लीन चिट देने के मूड में है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला कहते हैं कि कैग जैसी संवैधानिक संस्था के कामकाज को प्रभावित करने की नापाक कोशिश हो रही है।

वित्त मंत्रालय की स्थायी समिति ने नोटबंदी पर अपनी रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार समिति में भाजपा के सदस्यों ने इसकी सिफारिशों पर अपने कड़े एतराज दर्ज किए हैं। समिति के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली को उन्होंने साफ बता दिया है कि रिपोर्ट में संशोधन की जरूरत है, तभी इसके अंतिम निष्कर्षों पर आम सहमति बन पाएगी।

कमेटी में सबसे ज्यादा 12 सदस्य भाजपा के हैं। इसके बावजूद पिछले चार साल में उसने 69 रिपोर्ट आम सहमति से पेश की हैं। लेकिन नोटबंदी के मामले पर ऐसा नहीं हो पा रहा है। रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट में फाइनल आंकड़े आने के बाद से विपक्षी सदस्यों के तेवर धारदार हो चुके हैं।

 बैंकों के एनपीए, बड़े कर्जदारों के भाग जाने और उनके मामलों पर आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का नोट जाहिर होने के बाद संसद की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने पीएमओ से जवाब मांगा है। संकेत हैं कि कमेटी की रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में पेश हो जाएगी। इसमें सरकार के प्रति कोई नरमी बरते जाने की उम्मीद नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर सुब्रत मुखर्जी का कहना है कि दोनों ही मामलों पर क्रिटिकल रिपोर्ट आएंगी, क्योंकि सरकार बेहतर सफाई नहीं दे पाई है। आरबीआई के आंकड़े विपरीत आए हैं तो सरकार को अपने फैसले की गलती मान लेनी चाहिए। वित्त मंत्रालय पर संसदीय समिति के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली ने कहा कि हमने सभी रिपोर्ट आम सहमति से तैयार की हैं। इस बार असहमति होगी तो हम उसे दर्ज कर लेंगे।

About Author

Leave A Reply