लॉक डाउन (भावनात्मक रचना)

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अभय नंदन श्रीवास्तव(एडवोकेट,कटिहार)

लॉक डाउन का मज़ाक उड़ाने वाले,
तेरा मज़ाक उड़ जाएगा।
सुना है, तुझे डर नहीं लगता है
कोरोनावायरस से,
यदि कहीं तुम उसका शिकार हो जाओगे,
तो बड़ा हीं पछताओगे।
कोरोनटाइन क्या होता है?
ये भी समझ जाओगे।
नहीं लगाना चाहते हो मास्क,
पर जानों इसे लगाना है ,
एक जरूरी टास्क।
चौकिदार घूम रहा है चारों ओर,
पकड़े गए तो जुर्माना भरना ,
फिर मत करना शोर,
शोर किया ,तो डंडा बरसेगा,
पीठ की हड्डी भी तेरा ससरेगा।
अभी नहीं समझते, सेनेटाइजेशन
वो भी समझ जाओगे।
जब कोरोनावायरस से,
तुम नहीं बच पाओगे।
भाई, वक्त है!
अभी संभलकर चलने का,
फिर दोष ना देना – मोदी जी का।
उन्होंने ,सबों को बहुत समझाया,
पर तुम्हें कोरोना क्या है?
ये ,समझ में न आया।।
ऐ, लॉक डाउन का मज़ाक उड़ाने वाले,
घर में रहो, सुरक्षित रहो,
मास्क लगा, लॉक डाउन को मानों,
वरना तू स्वर्ग सिधार जाएगा।
और तेरा परिवार भी बिखर जाएगा।।
अतः लोगों को जागरूक कर,
ये जब तू समझायेगा,
तो तेरा और तेरे परिवार का, कोरोना ,कुछ भी नहीं कर पाएगा।

अभय नंदन प्रसाद श्रीवास्तव, अधिवक्ता/कटिहार

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