Acharya Manoj Awasthi Ji Maharaj

व्यंग/ एक रात में दो-दो चांद खिले

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जी हाँ जनाब आज की शाम बड़ी शोख़,बड़ी नटखट है, आज चांद प्रेमियों को नींद नहीं आएगी क्योंकि आज की शाम एक अदद आसमां में एक नही बल्किं दो-दो चांद दिखाएगी। एक सुपर मून और एक ब्ल्यू ब्लड मून।और चाँद भी ऐसे-वैसे नहीं इत्ते गोरे और चमकीले चांद कि जिस के आगे चौदहवीं का चाँद भी फीका पड़ जाए क्योंकि ये चांद चौदहवीं के चांद से भीे 13 % ज्यादा चमकीला होगा और सेहत में भी साधारण चाँद से 14%बड़ा होगा।और धरती के इतने पास आकर सटेगा जितना कि वो कभी नहीं सटा था। जी हां 50हजार किलोमीटर  से ज्यादा की नजदीकियां होगी धरती और चांद के बीच। जलकुक्कड़ राहू की तो ये बिंदास सीन देखकर हवा ही खराब हो जाएगी।वैसे भी तो यह संयोग पूरे-152 साल बाद आया है।

अगर राजनीति की भाषा में कहें तो ये अच्छे दिनोंवाली  सरकार की एक सुपर-डुपर उपलब्धि ही मानी जाएगी।क्योंकि पिछली सरकार जो काम  खुद या अपने गठबंधन के बूते पर 70 साल में एक दफा भी नहीं कर पाई वो काम इस सरकार ने बिना कोई शोर-शराबा किये चुपचाप कर के दिखा दिया। जो काम करते हैं वो शोर शराबा नहीं करते।और यह चंद्रग्रहण भी कोई पांच- दस मिनट वाला नहीं है भैये बल्कि पूरे तीन घंटे चौबीस मिनटवाला स्पेशल क्वालिटी का ग्रहण है।अबतक का सबसे ज्यादा लंबी अवधि का चंद्रग्रहण।कुछ लोग कहते हैं कि 152 साल पहले यानी कि सन्1866 में भी इतना ही लंबा ग्रहण पड़ा था।मगर हमें उससे क्या लेना-देना।तब देश गुलाम था।अँगरेजों का राज था और कहते हैं कि तब अंग्रेजी राज्य इतना बड़ा होता था कि उसमें सूरज ही नहीं डूबता था।तो जब सूरज डूबता ही नहीं था तो फिर चंद्रग्रहण पड़ा ही कैसे होगा।

यह सब अँगरेजों के लिखवाए गए इतिहास का गड़बल झाला है। बिलकुल निराधार इतिहास। आधारकार्ड रहित अँगरेजों का निराधार इतिहास।और अगर इस निराधार इतिहास को सही भी मानलें तो इसमें गर्व करने जैसी क्या बात है?देश की आजादी के बाद तो यह पहला ही इतना  लंबा चंद्रग्रहण है।और इस ग्रहण में चाँद  रंग भी तीन-तीन बार बदलेगा।पहले सफेद फिर नीला और उसके बाद नारंगी। जिस चांद को नारंगी रंग में फिरंगी भी नहीं रंग सके आज वो चाँद आपके सामने है। चाँद हरा नहीं दिखेगा यह जरूर सेकुलर उदासी का कारण हो सकता है मगर शेष-विशेष देशवासियों के लिए तो यह हर्ष का विषय है।

मेरे लिए तो यह चंद्र ग्रहण सपरिवार हर्ष का विषय है।पहली प्रसन्नता तो यह कि ग्रहण में सूतक लग जाने के कारण देवताओं को स्नान नहीं कराया जाता है सो इस ठंड में अपनी निजी पत्नी के इकलौते पतिदेवता को यानी कि हमको ठंड में नहाने से छुटकारा मिल गया दूसरा ग्रहण के दौरान भी तुलसी शुद्ध रहती है इसलिए- मैं तुलसी तेरे आंगन की ,अखंड रट लगानेवाली परम पूज्य पत्नी से पकौड़े तलवाकर तो खा ही सकता हूँ।पकौड़े खाना और बनाना यूँ भी देशहित में आजकल बहुत  जरूरी हो गया है।आप भी इस स्पेशल चंद्र ग्रहण पर  मंगल नहीं तमाम सारी अमंलकारी हृदयविदारक राहुकामनाएं स्वीकार करें!

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